24x7 गौ रेस्क्यू हेल्पलाइन: +91 76652 5281180G व 12A रसीदेंEnglishहिंदी
गौ रक्षा आपातकालीन सेवा समितिचंडावल नगर (पाली), राजस्थान

सड़क किनारे से स्वस्थ होने तक

हर दिन, हर घंटे, यहाँ कोई न कोई दर्द में पड़ी गाय की सेवा कर रहा होता है।

यही वह काम है, जो आपके दान से संभव होता है।

[पृष्ठभूमि तस्वीर: स्वस्थ हो रही गाय के साथ सेवक और डॉक्टर]
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आप फ़ोन करते हैं

कोई भी घायल गाय देखे, तो कॉल करे या ऑनलाइन सूचना दे।

2

हम पहुँचते हैं

हमारी एम्बुलेंस और प्रशिक्षित सेवक तुरंत मौके पर पहुँचते हैं।

3

हम उपचार करते हैं

हमारे केंद्र में डॉक्टर उसका इलाज करते हैं — सर्जरी, दवा, देखभाल।

4

वह जीती है

वह स्वस्थ होती है और हमारी गौशाला में उसे सुरक्षित घर मिलता है।

24x7

आपातकालीन बचाव

वाहन की टक्कर, नाले में फँसी या भूख से गिरी हुई गाय — हमारी एम्बुलेंस हर कॉल पर, किसी भी समय, किसी भी मौसम में पहुँचती है। हमने आज तक कोई कॉल अनसुनी नहीं छोड़ी।

आपातकाल सूचित करें
चिकित्सा सेवा

उपचार एवं शल्य चिकित्सा

हड्डी टूटना, गहरे घाव, कीड़े पड़े घाव और पेट में पॉलीथिन। जिन मामलों में दूसरे हार मान लेते हैं, हमारे पशु चिकित्सक उनका इलाज करते हैं — और ठीक होने तक साथ रहते हैं।

एक उपचार का खर्च उठाएँ
स्थायी घर

24x7 एम्बुलेंस सेवा

हाइड्रोलिक लिफ्ट, स्ट्रेचर और प्राथमिक उपचार किट से सुसज्जित हमारी गौ एम्बुलेंस चौबीसों घंटे तैयार रहती है। प्रशिक्षित सेवक घायल गायों को सुरक्षित उठाकर हमारे उपचार केंद्र तक लाते हैं।

गाय गोद लें
और सेवाएँ

रेस्क्यू से आगे

आश्रय एवं चारा

बूढ़ी, अंधी, अपाहिज या बेसहारा — ये गायें फिर कभी सड़कों पर नहीं लौटेंगी। हमारी गौशाला में उन्हें जीवन भर हरा चारा, साफ़ पानी, छाया और प्यार मिलता है।

अंतिम संस्कार

जिन गायों को बचाया नहीं जा सका, उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार। कोई भी जीवन यूँ ही नहीं फेंका जाता — हर गौमाता को आदर के साथ विदाई दी जाती है।

जागरूकता अभियान

स्कूलों और बाज़ारों में यह समझाना कि प्लास्टिक गायों की जान कैसे लेता है, और ज़रूरत में पड़ी गाय की मदद कैसे करें। हम आसपास के गाँवों में निःशुल्क जाँच और टीकाकरण शिविर भी लगाते हैं।

5000+सड़कों से बचाई गई ज़िंदगियाँ
350गायें जिनका घर अब हमारी गौशाला है
24x7एम्बुलेंस, हर एक रात
1200+परिवार जो हर महीने सहयोग करते हैं

आपके बिना यह कुछ भी संभव नहीं।

अगले रेस्क्यू के पीछे के हाथ बनिए।

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