हर रेस्क्यू के पीछे के हाथ और दिल
वे त्योहार, नींद और परिवार के साथ खाना तक छोड़ देते हैं — ताकि कोई गाय अकेली न रहे।
संस्थापक व ट्रस्टी
वे लोग जिन्होंने कहा, “अब और नहीं”
[पोर्ट्रेट]
रमेश सिंह राठौड़
संस्थापक एवं अध्यक्ष
“गौ सेवा दान नहीं है। यह हमारा कर्तव्य है।”
[पोर्ट्रेट]
महेंद्र कुमार चौधरी
सचिव
“मैंने एक गाय को पूरी रात मदद का इंतज़ार करते देखा। मैं ऐसा फिर कभी नहीं देखना चाहता।”
[पोर्ट्रेट]
सुरेश प्रजापत
कोषाध्यक्ष
“दानदाताओं का दिया हर रुपया एक वचन है। मैं सुनिश्चित करता हूँ कि हम उसे निभाएँ।”
डॉक्टर व रेस्क्यू टीम
हर रात, ड्यूटी पर
[तस्वीर]
डॉ. विक्रम शर्मा
मुख्य पशु चिकित्सक
[तस्वीर]
डॉ. पूजा मीणा
पशु शल्य चिकित्सक
[तस्वीर]
भंवर लाल देवासी
एम्बुलेंस प्रमुख
[तस्वीर]
गोविंद राम सीरवी
गौशाला प्रभारी
हमारे स्वयंसेवक
हर रविवार, हर रेस्क्यू की रात
[तस्वीर]
कविता सोनी
स्वयंसेवक समन्वयक
स्वयंसेवक बनें
जान बचाने के लिए डॉक्टर होना ज़रूरी नहीं।
रविवार को गायों को चारा खिलाइए। रेस्क्यू में हाथ बँटाइए। तस्वीरें खींचिए। बात आगे फैलाइए। हर हाथ की ज़रूरत है।
[तस्वीर: गायों को चारा खिलाते स्वयंसेवक]
