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गौ रक्षा आपातकालीन सेवा समितिचंडावल नगर (पाली), राजस्थान
बचाव डायरी

हमारी एम्बुलेंस टीम के साथ एक रात

रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक — चार कॉल, तीन बचाव, और एक गाय जिसके साथ हम सुबह तक बैठे रहे।

लेखक: Rescue Team1 मिनट में पढ़ें

ज़्यादातर लोग कभी नहीं देखते कि हमारी हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद क्या होता है। इसलिए एक रात हमने डायरी लिखी।

रात 9:40 — पहली कॉल

बस स्टैंड के पास एक गाय को मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी थी। उसके पैर से ख़ून बह रहा था, पर हड्डी नहीं टूटी थी। हमारी टीम ने मौके पर ही घाव साफ़ करके पट्टी बाँधी और टाँके लगाने के लिए उसे केंद्र ले आई।

रात 12:15 — गड्ढे में फँसी

एक गर्भवती गाय बाईपास पर निर्माण के गड्ढे में फिसल गई थी। उसे सुरक्षित बाहर निकालने में चार सेवक, रस्सियाँ और एक उधार का ट्रैक्टर लगा। वह डरी हुई थी, पर उसे चोट नहीं आई थी।

रात 2:04 — टोल प्लाज़ा

एक ट्रक ड्राइवर का फ़ोन आया: एक युवा गाय को टक्कर लगी थी और वह खड़ी नहीं हो पा रही थी। हमारी एम्बुलेंस 2:31 पर उसके पास पहुँची। एक सेवक सड़क पर उसके पास बैठकर उसे शांत करता रहा और वाहनों को दूर रखता रहा, जबकि बाक़ी ने उसे स्ट्रेचर पर उठाया। 3:15 तक हमारे पशु चिकित्सक उसकी टूटी टाँग जोड़ रहे थे।

सुबह 4:30 — जिसे हम बचा नहीं सके

आख़िरी कॉल एक बूढ़ी गाय की थी जो खेत के किनारे पड़ी थी, हिलने में भी असमर्थ। हमारे पशु चिकित्सक ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। हम उसके पास बैठे, उसे पानी पिलाया और सुबह तक उसे गर्म रखा। अंत में वह अकेली नहीं थी। उसी सुबह हमने उसे सम्मानपूर्वक विदाई दी।

सुबह 6:00

चार कॉल। तीन बचाव। एक विदाई। और फिर टीम ने एम्बुलेंस धोई और अगली रात की तैयारी में लग गई। आपकी सेवा इसी का ख़र्च उठाती है।

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