गोपाष्टमी गौमाता का त्योहार है — माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण पहली बार गोकुल की गायों को चराने ले गए थे। हमारी गौशाला में यह वर्ष का सबसे आनंदमय दिन होता है।
सुबह की पूजा
दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले हुई। सेवकों ने गायों को नहलाया, उनके सींगों को रंगों से सजाया और उनके गले में गेंदे की ताज़ा मालाएँ पहनाईं। गौशाला के आँगन में पूजा हुई, जिसमें चंडावल नगर और आसपास के गाँवों के परिवार शामिल हुए।
हर गाय के लिए दावत
आरती के बाद हर गाय — नन्हे भोलू से लेकर बूढ़ी कामधेनु तक — को आगंतुकों ने अपने हाथों से गुड़, हरा चारा और रोटियाँ खिलाईं। बच्चे सबसे ख़ुश मददगार थे।
आने वाले वर्ष के लिए सेवा
कई परिवारों ने इसी दिन मासिक सेवा शुरू की या किसी प्रियजन के नाम पर गाय गोद ली। आने, सेवा करने और दान देने वाले सभी का हार्दिक धन्यवाद।
यदि आप इस वर्ष हमारे साथ नहीं जुड़ पाए, तो आपका सदैव स्वागत है। आइए, उन्हें अपने हाथों से खिलाइए।
