भोलू और बरसात का नाला
ठंडे पानी में तीन घंटे, फिर एक दुकानदार ने उसकी पुकार सुनी और हमें फ़ोन किया।
मूसलाधार बरसात के दौरान एक छोटा बछड़ा मुख्य बाज़ार के पास उफनते नाले में फिसल गया। तीन घंटे तक वह ठंडे, तेज़ बहते पानी में खड़ा रोता रहा, इतना छोटा कि बाहर नहीं निकल सकता था।
दुकान का शटर बंद कर रहे एक दुकानदार ने उसकी पुकार सुनी और हमारी हेल्पलाइन पर फ़ोन किया। हमारी बचाव टीम रस्सियाँ और हार्नेस लेकर पहुँची, और दो सेवक नाले में उतरकर उसे धीरे से बाहर निकाल लाए।
वह काँप रहा था, थका हुआ था और गंदा पानी निगल चुका था। केंद्र में उसे सुखाया गया, गर्म रखा गया और अगले एक हफ़्ते तक छाती के संक्रमण का इलाज किया गया।
हमने उसका नाम भोलू रखा। आज वह हमारी गौशाला का सबसे नटखट बछड़ा है — हर आने वाले की रोटी चुरा लेता है और बड़ी गायों के चारों ओर दौड़ता रहता है।
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