तीन पैरों पर चलती गंगा
आधी रात तेज़ रफ़्तार ट्रक की टक्कर। उसने एक पैर खो दिया — पर हौसला नहीं।
आधी रात के कुछ ही देर बाद टोल प्लाज़ा के पास हाईवे से एक ट्रक ड्राइवर ने हमें फ़ोन किया। एक तेज़ रफ़्तार ट्रक ने एक युवा गाय को टक्कर मार दी थी और वह सड़क के बीचोंबीच पड़ी थी, हिल भी नहीं पा रही थी।
हमारी एम्बुलेंस तीस मिनट से भी कम में उसके पास पहुँच गई। एक सेवक सड़क पर उसके पास बैठकर उसे शांत करता रहा और वाहनों को दूर रखता रहा, जबकि बाक़ी सेवकों ने उसे स्ट्रेचर पर उठाया। उसका पिछला पैर पूरी तरह कुचल चुका था।
उपचार केंद्र में हमारे पशु चिकित्सक पूरी रात जूझते रहे। उसकी जान बचाने के लिए पैर काटना पड़ा। इसके बाद कई दिनों तक वह खड़ी होने से इनकार करती रही, और हमें लगा कि शायद वह कभी खड़ी न हो पाए।
फिर चौबीसवें दिन उसने तीन पैरों पर ख़ुद को उठाया और लड़खड़ाते हुए पहले क़दम रखे। पूरी टीम ख़ुशी से झूम उठी।
आज गंगा तीन पैरों पर चलती है — और फिर भी हर सुबह झुंड को पानी तक ले जाती है। उसे गोद लेने वाले परिवार का इंतज़ार है।
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