कामधेनु, 14 वर्ष की उम्र में छोड़ी गई
दूध देना बंद करने पर एक मंदिर के बाहर छोड़ दी गई। अब वह हर दोपहर धूप में झपकी लेती है।
चौदह वर्षों तक उसने एक परिवार को दूध दिया। जब उसने दूध देना बंद किया, तो एक शाम उसे मंदिर के बाहर बाँधकर छोड़ दिया गया।
कुछ दिनों तक श्रद्धालुओं ने उसे खिलाया, लेकिन वह बूढ़ी थी, उसके जोड़ कमज़ोर थे और वह ख़ुद भोजन नहीं ढूँढ पाती थी। जब वह गर्मी में गिर पड़ी, तो मंदिर के पुजारी ने हमें फ़ोन किया।
गौशाला में हमारे पशु चिकित्सकों ने उसका निर्जलीकरण और जोड़ों के दर्द का इलाज किया और उसे नरम आहार व पूरक आहार पर रखा। शुरू में वह किसी पर भरोसा करने में समय लेती थी।
आज हम उसे कामधेनु कहते हैं। वह शांत और धीमी है, गुड़ की शौक़ीन है, और हर दोपहर धूप में झपकी लेती है। उसे फिर कभी छोड़ा नहीं जाएगा — यह जीवन भर के लिए उसका घर है।
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कहानी पढ़ेंअगली कहानी अभी लिखी जानी बाक़ी है।
